जौनपुर की सियासत में एक बार फिर बड़ा नाम सुर्खियों में है ,नाम है अरशद खां

Neeraj Yadav Swatantra
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जौनपुर । ज़िले सियासत में इन दिनों एक नाम तेजी से चर्चा में है मोहम्मद अरशद खान का राजनीतिक सफर लंबा, मजबूत और प्रभावशाली रहा है।साल 1993 में वे जौनपुर सदर से पहले मुस्लिम विधायक बने, जिसने उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई।

वे कांशीराम के करीबी रहे और बहुजन समाज पार्टी के गठन में अहम भूमिका निभाई। 1994 में कांशीराम ने उन्हें बसपा का राष्ट्रीय सचिव और महाराष्ट्र का प्रभारी नियुक्त किया था। इसके बाद उन्होंने डॉ. मसूद अहमद के साथ नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी बनाई, जो करीब 20 वर्षों तक सक्रिय रही। इस दौरान डॉ. मसूद अहमद 12 साल और अरशद खान 8 साल तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे।

साल 2014 में मुलायम सिंह यादव के आग्रह पर उन्होंने अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय किया और समाजवादी पार्टी अरशद खान को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। अमर सिंह के बाद पूर्वांचल के 48 जिलों की जिम्मेदारी भी अरशद खान को सौंपी गई। वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव के रूप में सक्रिय हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में जौनपुर सदर विधानसभा में रिकॉर्ड प्रदर्शन देखने को मिला…

यहां सबसे ज्यादा 1,24,000 वोट हासिल हुए — जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। 2022 विधानसभा चुनाव में आखिरी दिन टिकट मिलने के बावजूद अरशद खान को करीब 90,000 वोट हासिल कर अपनी मजबूत पकड़ साबित की। राजनीति के साथ-साथ सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी गहरी पकड़ है। अम्बेडकर विचार मंच, भारत किसान यूनियन और मदर टेरेसा फाउंडेशन के जरिए वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक इस बार अरशद खान का लक्ष्य 1.5 लाख वोट का है।

अखिलेश यादव के विजन के साथ वे ज़मीनी स्तर पर लगातार सक्रिय हैं और पी.डी.ए. के मुद्दों पर काम कर रहे हैं।  एक बड़ा सवाल — क्या समाजवादी पार्टी आधिकारिक तौर पर उनके नाम का ऐलान करेगी सूत्र?


  अरशद खान का कही न कही इस सीट पर , सामाजिक न्याय की समझ, जमीनी पकड़ और सीधे शीर्ष नेतृत्व से जुड़ाव उन्हें एक मजबूत संभावित उम्मीदवार के रूप में पेश करता है। यही वजह है कि उनके हर कार्यक्रम को अब राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।


सवाल अब यह है कि क्या अखिलेश यादव जौनपुर सदर सीट पर कोई बड़ा दांव खेलने की तैयारी में हैं? अगर अरशद खान को यहां से उम्मीदवार बनाया जाता है, तो यह न सिर्फ स्थानीय समीकरण बदलेगा, बल्कि विपक्षी दलों के लिए भी चुनौती बन सकता है।


विपक्ष भी सतर्क

अरशद खान की सक्रियता ने सिर्फ सपा कार्यकर्ताओं को ही नहीं, बल्कि विपक्षी दलों को भी अलर्ट कर दिया है। जौनपुर में राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज होना इस बात का संकेत है कि आने वाला चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो सकता है, जहाँ एक तरफ अरशद खान की सपा सुप्रीमो से नज़दीकी से जौनपुर को उम्मीद है की जौनपुर की क़िस्मत बदल सकती है 


जनता क्या कहती है?

स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा आम हो गई है कि “कुछ बड़ा होने वाला है।” लगातार संपर्क, जनसुनवाई और जमीनी मुद्दों पर फोकस ये सब उन्हें जनता के और करीब ले जा रहा है।


*लेकिन लोगों का कहना है 2022 के चुनाव के बाद से अरशद खान लगातार क्षेत्र में सक्रिय दिख रहे हैं*


जौनपुर सदर में अरशद खान की बढ़ती सक्रियता सिर्फ एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि 2027 की चुनावी पटकथा का पहला अध्याय लग रही है। अब देखना यह है कि क्या यह रणनीति सच में चुनावी टिकट तक पहुंचती है या फिर यह सिर्फ संगठन मजबूत करने की कवायद है,लेकिन एक बात तय है जौनपुर की सियासत अब शांत नहीं रहने वाली ।

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