TET अनिवार्यता पर सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, 25 लाख शिक्षकों के लिए जगी न्याय की आस

Neeraj Yadav Swatantra
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नई दिल्ली/लखनऊ। “मंजिल उन्हीं को मिलती है, जो अपने हौसलों से डरते नहीं…” — यह पंक्तियां उस संघर्ष की कहानी बयां करती हैं, जिसने लाखों शिक्षकों के भविष्य को नई उम्मीद दी है।

एक सितम्बर 2025 को जारी आदेश ने देशभर के उन शिक्षकों के सामने संकट खड़ा कर दिया, जिनकी सेवा पांच वर्षों से अधिक थी। आदेश के अनुसार, उन्हें दो वर्षों के भीतर TET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया, जिससे शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया।

इसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में शिक्षक श्री संतोष सिंह बघेल ने इस फैसले के खिलाफ न्यायिक लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने श्री राजेश सिंह और श्री अमित सिंह के साथ मिलकर एक लीगल टीम का गठन किया, जिसका उद्देश्य विधिक तरीके से शिक्षकों को न्याय दिलाना था।

सीमित संसाधनों के बावजूद टीम ने साहसिक निर्णय लेते हुए देश के प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ताओं की सेवाएं लीं और विभिन्न राज्यों को पुनर्विचार याचिका में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धीरे-धीरे यह पहल एक आंदोलन का रूप लेती गई और हजारों शिक्षक इससे जुड़ते चले गए।

आज उसी संघर्ष का परिणाम सामने आया है—सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर ली है। इस निर्णय से करीब 25 लाख शिक्षकों में न्याय की नई उम्मीद जगी है।

यह कहानी केवल एक कानूनी जीत की नहीं, बल्कि हौसले, एकता और संघर्ष की मिसाल बन गई है।

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