आवाज़ न्यूज़ | जौनपुर।
नगर क्षेत्र से जुड़े एक गंभीर गैंगरेप मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। श्वेता यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जौनपुर ने कोतवाली पुलिस को तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना शुरू करने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
न्यायालय में क्या कहा गया
न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र में पीड़िता (काल्पनिक नाम) ने बताया कि उसकी पहचान एक युवक से उसके भाई के माध्यम से हुई थी, जो अक्सर उसके घर आता-जाता था। इसी दौरान आरोपी ने किसी तरह उसका मोबाइल नंबर हासिल कर बातचीत शुरू की और कथित तौर पर सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया।
पीड़िता के अनुसार, इसी बहाने उसे बुलाकर शादी का दबाव बनाया गया और बाद में एक किराए के मकान में रखा गया, जहां उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए गए। आरोप है कि उसे कमरे में बंद कर बाहर से ताला लगाया जाता था और लगातार धमकियां दी जाती थीं।
गैंगरेप का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि एक दिन आरोपी अपने दो अन्य साथियों के साथ वहां आया और तीनों ने मिलकर उसके साथ जबरदस्ती की। बातचीत के दौरान उसे बेचने की साजिश की बात भी सामने आई, जिससे भयभीत होकर वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल रही।
पुलिस ने नहीं की सुनवाई, न्यायालय की शरण
पीड़िता का कहना है कि उसने घटना की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी, लेकिन थाने पर उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने कोतवाली पुलिस को तत्काल केस दर्ज कर निष्पक्ष व समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
न्यायालय के आदेश के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है।
.png)
