शाहगंज का चुनावी गणित: सपा की लोकसभा में बढ़त, विधानसभा में मामूली हार और SIR के बाद की तस्वीर

Neeraj Yadav Swatantra
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आवाज़ न्यूज़ 

लेख- नीरज यादव "स्वतंत्र"

जौनपुर।

शाहगंज विधानसभा क्षेत्र की राजनीति बीते कुछ वर्षों में आंकड़ों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को यहां बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था, जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से पार्टी ने बढ़त दर्ज की। अब SIR-2026 के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने इस पूरे चुनावी गणित को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

विधानसभा चुनाव 2022: 719 वोट से चूकी जीत

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में शाहगंज सीट पर निषाद पार्टी के प्रत्याशी को 87,233 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को 86,514 वोट प्राप्त हुए। दोनों के बीच अंतर सिर्फ 719 वोट का रहा।

चुनाव नतीजों के बाद यह साफ हुआ था कि यह हार किसी एक बड़े कारण से नहीं, बल्कि कई छोटे-छोटे स्थानीय फैक्टरों और वोटों के बिखराव का नतीजा थी।

लोकसभा चुनाव 2024: सपा को स्पष्ट बढ़त

इसके दो साल बाद हुए लोकसभा चुनाव में शाहगंज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पड़े वोटों का रुख बदला नजर आया। समाजवादी पार्टी को यहां 1,03,006 वोट मिले, जबकि भाजपा को 85,236 वोट प्राप्त हुए।

इस तरह लोकसभा चुनाव में सपा को 17,770 वोट की बढ़त मिली। स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे संगठनात्मक मजबूती, गठबंधन के असर और वोटरों की एकजुटता के रूप में देखा गया।

भाजपा-निषाद गठबंधन की स्थिति

भाजपा और निषाद पार्टी का गठबंधन 2022 में विधानसभा स्तर पर सफल रहा था। निषाद पार्टी के प्रत्याशी की जीत इस बात का संकेत थी कि गठबंधन ने पिछड़ा और मछुआरा समाज के एक हिस्से को अपने पक्ष में जोड़ने में सफलता पाई।

हालांकि लोकसभा चुनाव 2024 में यही गठबंधन शाहगंज क्षेत्र में समाजवादी पार्टी से पीछे रह गया। इससे यह संकेत मिलता है कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मतदाताओं का व्यवहार अलग-अलग रहा है और भाजपा-गठबंधन के सामने स्थानीय स्तर पर समर्थन बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

बहुजन समाज पार्टी की भूमिका

शाहगंज विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति भले ही निर्णायक न दिखे, लेकिन उसका वोट बैंक अब भी प्रभावशाली माना जाता है।

2022 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को 48,957 वोट मिले थे, जबकि लोकसभा चुनाव 2024 में भी पार्टी को 38,650 वोट प्राप्त हुए।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शाहगंज जैसी करीबी सीट पर बीएसपी का यह वोट प्रतिशत हार-जीत का अंतर तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है, खासकर तब जब मुकाबला सीधा सपा और भाजपा-गठबंधन के बीच हो।

SIR-2026: ड्राफ्ट सूची में 61 हजार से अधिक नाम कम

इसी बीच SIR-2026 के तहत मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण किया गया। ड्राफ्ट आंकड़ों के अनुसार शाहगंज विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 4,12,236 से घटकर 3,51,222 रह गई है।

यानी 61,014 नाम मतदाता सूची से कम हुए हैं।

हालांकि यह सूची अभी ड्राफ्ट है और इसमें संशोधन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में नाम कम होना सभी राजनीतिक दलों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।

तीन आंकड़े, कई संभावनाएं

अगर शाहगंज की राजनीति को इन तीन तथ्यों के आधार पर देखा जाए—

विधानसभा चुनाव में हार: 719 वोट

लोकसभा चुनाव में सपा की बढ़त: 17,770 वोट

SIR में कटे नाम: 61,014

तो यह साफ है कि आने वाले चुनाव में मतदाता सूची की भूमिका पहले से कहीं अधिक निर्णायक होगी।

आगे की राह

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शाहगंज जैसी सीट पर समाजवादी पार्टी लोकसभा बढ़त को अगर विधानसभा में बदलना चाहती है, तो उसे मतदाता सूची पर विशेष ध्यान देना होगा।

वहीं भाजपा-निषाद गठबंधन के सामने 2022 की जीत को आधार बनाकर फिर से सामाजिक समीकरण साधने की चुनौती होगी।

बहुजन समाज पार्टी के लिए यह सीट ऐसी है, जहां सीमित लेकिन संगठित वोट बैंक उसे निर्णायक भूमिका में ला सकता है।

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