जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों में 15 अप्रैल 2026 से सेमेस्टर परीक्षाएं जारी हैं, लेकिन परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। छात्रों और शिक्षाविदों ने परीक्षा नियंत्रक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताई है।
आरोप है कि नकल रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बनाए जाने वाले ‘उड़ाका दल’ का गठन समय पर नहीं किया गया। परीक्षाओं का बड़ा हिस्सा संपन्न होने के बाद प्रतीकात्मक रूप से समितियों का गठन किया जा रहा है, जिससे ‘नकल विहीन परीक्षा’ के दावों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतों में यह भी कहा गया है कि उड़ाका दल के गठन में विलंब किया गया, जिससे उसकी उपयोगिता पर संदेह पैदा होता है। साथ ही समितियों में क्षेत्रीय पक्षपात और सीमित लोगों को बार-बार शामिल किए जाने के आरोप भी सामने आए हैं। इसके अलावा, यदि उड़ाका दल सक्रिय नहीं है तो उसके नाम पर खर्च होने वाले संसाधनों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मामले को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा गया है कि यदि उड़ाका दल का उद्देश्य परीक्षा की निगरानी है तो इसके गठन में देरी क्यों की गई। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि इस व्यवस्था का कोई महत्व नहीं है तो इसे जारी रखने का औचित्य क्या है।
ज्ञापन देने वालों का कहना है कि इस तरह की व्यवस्था से मेधावी छात्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर असर पड़ रहा है।
इस संबंध में डॉ. जयप्रकाश सिंह, डॉ. यदुवंश कुमार, डॉ. जितेश सिंह और डॉ. प्रशांत कुमार ने परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और पूरे मामले की जानकारी कुलपति को भी दी है।
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस मामले में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

