आवाज़ न्यूज़ विशेष: तेल की प्यास और सोने की चमक, जानिए किन चीज़ों को खरीदने में भारत खर्च करता है सबसे ज्यादा पैसा

Neeraj Yadav Swatantra
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 आवाज़ न्यूज़ 

1. तेल का 'खौफनाक' आंकड़ा ​भारत हर साल लगभग 18.5 लाख करोड़ रुपये सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस के कच्चे माल पर खर्च कर देता है। यह भारत के कुल आयात बिल का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यदि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाता है, तो इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है। ​2. इलेक्ट्रॉनिक्स: चीन पर निर्भरता ​स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी के मामले में हम हर साल करीब 7.10 लाख करोड़ रुपये बाहर भेज रहे हैं। इसमें से एक बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए सरकार इस पैसे को देश के भीतर रोकने की कोशिश कर रही है। ​3. सोना: निवेश या देश पर बोझ? ​भारतीय घरों की तिजोरियों में जाने वाला सोना देश के खजाने पर 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भार डालता है। यह वह पैसा है जो अगर व्यापार में लगता तो देश की जीडीपी और तेजी से बढ़ती। ​4. खाद्य तेल: रसोई की महंगाई का कारण ​हैरानी की बात है कि दाल और तेल के लिए भी हम विदेशों पर निर्भर हैं। पाम ऑयल और सूरजमुखी के तेल पर हम सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं। ​निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता ही समाधान ​'आवाज़ न्यूज़' के इस डेटा विश्लेषण से स्पष्ट है कि भारत को ऊर्जा (Energy) और टेक्नोलॉजी (Electronics) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना ही होगा। यदि हम अपनी तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्भरता को 25% भी कम कर लेते हैं, तो देश के पास विकास कार्यों के लिए सालाना 5 से 6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट होगा। ​ब्यूरो रिपोर्ट, आवाज़ न्यूज़।


भारत की अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए विदेशों से सामान खरीदना एक मजबूरी भी है और जरूरत भी। डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत और अंतरराष्ट्रीय बाजार की हलचल हमारे देश के बजट पर सीधा असर डालती है। आइए देखते हैं भारत किन चीज़ों पर सबसे ज्यादा पैसा लुटा रहा है।

भारत के शीर्ष 5 आयात मद (लाख करोड़ रुपये में)

(नोट: ये आंकड़े मौजूदा विनिमय दर और वार्षिक अनुमानों पर आधारित हैं)


क्रम

वस्तु (Category)

वार्षिक खर्च (अनुमानित)

प्रमुख स्रोत देश

1

कच्चा तेल और पेट्रोलियम

~18.50 लाख करोड़ ₹

रूस, इराक, सऊदी अरब

2

इलेक्ट्रॉनिक्स और गैजेट्स

~7.10 लाख करोड़ ₹

चीन, वियतनाम, दक्षिण कोरिया

3

सोना (Gold)

~4.05 लाख करोड़ ₹

स्विट्जरलैंड, यूएई

4

कोयला और ब्रिकेट्स

~3.20 लाख करोड़ ₹

इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया

5

मशीनरी और उपकरण

~2.80 लाख करोड़ ₹

जर्मनी, चीन, जापान 

1. तेल का 'खौफनाक' आंकड़ा

​भारत हर साल लगभग 18.5 लाख करोड़ रुपये सिर्फ पेट्रोल, डीजल और गैस के कच्चे माल पर खर्च कर देता है। यह भारत के कुल आयात बिल का लगभग एक तिहाई हिस्सा है। यदि भारत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) और सौर ऊर्जा को तेजी से अपनाता है, तो इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा बचाया जा सकता है।

2. इलेक्ट्रॉनिक्स: चीन पर निर्भरता

​स्मार्टफोन, लैपटॉप और टीवी के मामले में हम हर साल करीब 7.10 लाख करोड़ रुपये बाहर भेज रहे हैं। इसमें से एक बड़ा हिस्सा चीन को जाता है। सेमीकंडक्टर मिशन के जरिए सरकार इस पैसे को देश के भीतर रोकने की कोशिश कर रही है।

3. सोना: निवेश या देश पर बोझ?

​भारतीय घरों की तिजोरियों में जाने वाला सोना देश के खजाने पर 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भार डालता है। यह वह पैसा है जो अगर व्यापार में लगता तो देश की जीडीपी और तेजी से बढ़ती।

4. खाद्य तेल: रसोई की महंगाई का कारण

​हैरानी की बात है कि दाल और तेल के लिए भी हम विदेशों पर निर्भर हैं। पाम ऑयल और सूरजमुखी के तेल पर हम सालाना 1.75 लाख करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।

​'आवाज़ न्यूज़' के इस डेटा विश्लेषण से स्पष्ट है कि भारत को ऊर्जा (Energy) और टेक्नोलॉजी (Electronics) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना ही होगा। यदि हम अपनी तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्भरता को 25% भी कम कर लेते हैं, तो देश के पास विकास कार्यों के लिए सालाना 5 से 6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट होगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, आवाज़ न्यूज़।


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