Ghazipur News गाज़ीपुर: राज्यपाल के आगमन में दिव्यांग युवक की अनसुनी पीड़ा, प्रशासन पर उठे सवाल

Neeraj Yadav Swatantra
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गाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश की महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के गाज़ीपुर आगमन को लेकर जिले के दिव्यांगजनों में उम्मीद जगी थी कि उन्हें अपनी समस्याएं सीधे रखने का अवसर मिलेगा, लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था के चलते एक गंभीर रूप से बीमार दिव्यांग युवक की पीड़ा अनसुनी रह गई।


युवराजपुर निवासी कुश तिवारी, जो मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं, महामहिम से मिलकर अपनी स्थिति से अवगत कराना चाहते थे। कुश अपने वाहन से उतरकर दो लोगों के सहारे करीब 300 मीटर पैदल चलकर पुलिस लाइन स्थित कार्यक्रम स्थल तक पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दो बार इशारों में अपनी बात रखने का प्रयास भी किया, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से उन्हें महामहिम से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।


हालांकि कार्यक्रम में सुरक्षा और प्रोटोकॉल व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ रही, लेकिन एक गंभीर दिव्यांगजन को अपनी पीड़ा रखने का अवसर न मिलना मानवीय दृष्टिकोण से निराशाजनक माना जा रहा है। पीड़ित कुश तिवारी पूर्व में भी जनता दरबार के माध्यम से मुख्यमंत्री तक अपनी समस्या पहुंचाने का प्रयास कर चुके हैं।


गौरतलब है कि बिहार सरकार मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित मरीजों को छह लाख रुपये की आर्थिक सहायता और नौकरी में आरक्षण की सुविधा दे रही है, जबकि आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा ऐसे मरीजों को पांच हजार रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इस बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए कोई विशेष नीति या आर्थिक सहायता योजना लागू नहीं की गई है।


दिव्यांगजनों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए संवेदनशील और ठोस नीति बनाकर उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार दिया जाए।

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