गाय को संपत्ति मानने वालों को ललकारना जरूरी: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

Neeraj Yadav Swatantra
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 आवाज़ न्यूज़ जौनपुर। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को जौनपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गोमती नदी तट स्थित जमैथा गांव में महर्षि यमदग्नि मुनि के आश्रम में दर्शन-पूजन किया और संत समाज के साथ संवाद किया।


इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज के समय में शासन व्यवस्था गाय को माता के रूप में नहीं बल्कि संपत्ति के रूप में देख रही है। उन्होंने कहा कि जो लोग गाय को केवल संपत्ति मानते हैं, उन्हें ललकारना आवश्यक हो गया है।


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जौनपुर की धरती महर्षि यमदग्नि और भगवान परशुराम की तपोभूमि रही है। गोमती नदी के तट पर प्राचीन काल से ही गौसेवा और संरक्षण की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार महर्षि यमदग्नि ने इसी क्षेत्र में गौसेवा की थी।


उन्होंने कहा कि उस समय के राजा ने जबरन महर्षि यमदग्नि की गाय छीन ली थी। जब यह बात भगवान परशुराम को पता चली तो उन्होंने अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हुए राजा और उसकी सेना का वध कर गाय को वापस दिलाया था।


शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। यदि शासन व्यवस्था उसे केवल संपत्ति मानती है तो यह हमारी परंपरा और आस्था के विपरीत है। इसलिए संत समाज इस विषय पर आवाज उठाने के लिए बाध्य है।


उन्होंने कहा कि जौनपुर आकर महर्षि यमदग्नि का आशीर्वाद लेकर वह अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इस अवसर पर आश्रम में बड़ी संख्या में साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद रहे। शंकराचार्य ने पूजा-अर्चना कर देश और समाज के कल्याण की कामना भी की।

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