Jaunpur News ईरान-भारत रिश्तों की मिसाल बना जौनपुर, शिया कॉलेज की मजलिस में दिखा गंगा-जमुनी संगम

Neeraj Yadav Swatantra
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जौनपुर। नगर के शिया कॉलेज में आयोजित मजलिस इस बार सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक सौहार्द, इंसानियत और भारत-ईरान रिश्तों की मिसाल बनकर सामने आई। गुरुवार रात आयोजित मजलिस में उस समय विशेष महत्व जुड़ गया, जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई के प्रतिनिधि आयतुल्लाह डॉ. अब्दुल मजीद हकीम इलाही ने शिरकत कर लोगों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में आयतुल्लाह डॉ. हकीम इलाही ने कहा कि जौनपुर की सरज़मीन पर आकर उन्हें अपनापन महसूस हुआ। उन्होंने यहां की तहज़ीब, इल्म की परंपरा और गंगा-जमुनी संस्कृति को पूरी दुनिया के लिए मिसाल बताया।

उन्होंने भारत और ईरान के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक संबंध सदियों पुराने हैं। उन्होंने कहा कि इंसानियत सबसे ऊपर है और अलग-अलग मजहब व मुल्क होने के बावजूद आपसी मोहब्बत और भाईचारा ही समाज की असली ताकत है।

आयतुल्लाह इलाही ने कहा कि आज दुनिया नफरत और टकराव की राजनीति से गुजर रही है, लेकिन जौनपुर जैसे शहर यह साबित करते हैं कि भाईचारा और इंसानियत आज भी जिंदा है। यहां हिंदू और मुसलमान सिर्फ साथ नहीं रहते, बल्कि एक-दूसरे के दुख-सुख में भी शामिल होते हैं।

उन्होंने कहा कि हर धर्म शांति, मोहब्बत और इंसानियत का पैगाम देता है। अगर लोग अपने धर्म की मूल भावना को समझ लें तो समाज के कई विवाद अपने आप समाप्त हो जाएंगे।

मजलिस में महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों की भारी भीड़ उमड़ी। शिया और सुन्नी समुदाय के साथ अन्य वर्गों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को वास्तविक सामाजिक संगम का रूप दे दिया।

मौके पर विभिन्न अंजुमनों और सुन्नी समुदाय की ओर से सबील भी लगाई गई, जो जौनपुर की साझा संस्कृति और मेहमाननवाज़ी की पहचान बन गई।

मजलिस में मौलाना तकी नकवी, मौलाना कमर हसनैन, लखनऊ की टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना कारी शाह फजलुल मन्नान रहमानी तथा शेर वाली मस्जिद के इमाम मौलाना कारी ज़िया जौनपुरी ने भी तकरीर की। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध शायर अनीस जायसी ने किया।

– आवाज़ न्यूज़

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