1989 में जब अर्जुन सिंह यादव को जौनपुर सदर की जनता ने दलों से ऊपर उठकर चुना अपना नेता

Neeraj Yadav Swatantra
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 आवाज़ न्यूज़





1989 का विधानसभा चुनाव जौनपुर सदर की राजनीति में एक ऐतिहासिक और बेहद दिलचस्प मोड़ लेकर आया था। उस दौर में जब कांग्रेस, भाजपा, जनता दल और बसपा जैसी बड़ी राजनीतिक ताकतें मैदान में थीं, तब मतदाताओं ने किसी दल के प्रतीक पर नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के जनाधार और लोकप्रियता पर भरोसा जताया।


निर्दलीय प्रत्याशी अर्जुन सिंह यादव ने सभी राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करते हुए 33,018 मत प्राप्त किए और 37.55 प्रतिशत वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस के सिराज मेहंदी को 14,068 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया। सिराज मेहंदी को 18,950 मत (21.55 प्रतिशत) मिले, जबकि भाजपा के बद्री नाथ शास्त्री 10,005 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।


बहुजन समाज पार्टी के मोहम्मद तौफीक को 8,912 तथा जनता दल के उम्मीदवार छबी नाथ को 8,019 मत प्राप्त हुए। प्रमुख दलों के बीच वोटों का बिखराव हुआ, लेकिन जनता का भरोसा अर्जुन सिंह यादव के पक्ष में मजबूती से खड़ा दिखाई दिया।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 1989 का चुनाव इस बात का प्रमाण था कि जौनपुर सदर की जनता हमेशा से अपने स्वतंत्र राजनीतिक सोच और मजबूत जनाधार वाले नेताओं को महत्व देती रही है। यही वजह थी कि बड़े-बड़े दलों की मौजूदगी के बावजूद एक निर्दलीय उम्मीदवार ने विधानसभा का रास्ता तय किया।


जौनपुर की चुनावी यात्रा में 1989 का जनादेश आज भी एक ऐसे चुनाव के रूप में याद किया जाता है, जिसने यह संदेश दिया था कि जनता का विश्वास किसी दल की ताकत से कहीं अधिक प्रभावशाली होता है।


— आवाज़ न्यूज़


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