जौनपुर। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। INDIA गठबंधन के संभावित सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग दल अपनी-अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। इसी क्रम में जौनपुर जिले में कांग्रेस द्वारा तीन विधानसभा सीटों पर दावा किए जाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोर पकड़ रही है।
हालांकि कांग्रेस की इस मांग के बीच 2022 विधानसभा चुनाव के आंकड़े भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिले की 9 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था। पार्टी न तो कोई सीट जीत सकी और न ही अधिकांश सीटों पर प्रभावी मुकाबले में दिखाई दी।
उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस को जिले की नौ विधानसभा सीटों पर कुल 27,077 वोट प्राप्त हुए थे। सबसे बेहतर प्रदर्शन जौनपुर सदर सीट पर देखने को मिला, जहां कांग्रेस प्रत्याशी नदीम जावेद को 12,150 वोट मिले थे। इसके अलावा अधिकांश सीटों पर पार्टी का वोट दो से तीन हजार के बीच ही सिमटा रहा।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि गठबंधन की राजनीति में सीटों की मांग करना किसी भी दल का अधिकार है, लेकिन सीटों के बंटवारे में आमतौर पर पिछले चुनावी प्रदर्शन, संगठनात्मक ताकत और जीत की संभावना को प्रमुख आधार माना जाता है। ऐसे में जौनपुर में कांग्रेस की तीन सीटों की मांग पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठ रहे हैं।
विधानसभा चुनाव 2022 में बदलापुर, शाहगंज, मल्हनी, मुंगराबादशाहपुर, मड़ियाहूं, जफराबाद, मछलीशहर और केराकत सीटों पर कांग्रेस का जनाधार सीमित दिखाई दिया था। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवार जमानत तक नहीं बचा सके थे। यही कारण है कि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि यदि सीटों का निर्धारण केवल पिछले प्रदर्शन के आधार पर हुआ तो कांग्रेस के लिए तीन सीटों की दावेदारी को मजबूत ठहराना आसान नहीं होगा।
दूसरी ओर कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि 2022 और 2027 के बीच राजनीतिक परिस्थितियां बदल चुकी हैं। पार्टी संगठन को मजबूत करने और नए सामाजिक समीकरणों के सहारे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जता रही है। कांग्रेस का मानना है कि गठबंधन में हिस्सेदारी का फैसला केवल पुराने आंकड़ों से नहीं बल्कि वर्तमान राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
फिलहाल 2027 के चुनाव में अभी समय है और सीट बंटवारे पर अंतिम निर्णय भी दूर है, लेकिन जौनपुर में कांग्रेस की तीन सीटों की मांग ने राजनीतिक बहस जरूर छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में पार्टी अपने संगठन और जनाधार को कितना मजबूत कर पाती है और क्या उसके दावे को जमीनी समर्थन भी मिल पाता है।
आवाज़ न्यूज़

