पंचायतीराज विभाग की भर्ती में ओबीसी आरक्षण पर सवाल, निर्धारित 27% के मुकाबले मात्र 139 पद मिलने का दावा
आवाज़ न्यूज़ | लखनऊ
उत्तर प्रदेश पंचायतीराज विभाग की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (वीपीडीओ) भर्ती-2023 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को दिए गए आरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध भर्ती आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि ओबीसी वर्ग को संविधान एवं आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप पद आवंटित नहीं किए गए।
आंकड़ों के अनुसार भर्ती में कुल 1,468 पद निर्धारित थे। यदि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का पूर्ण लाभ मिलता तो उन्हें लगभग 396 पद मिलने चाहिए थे, जबकि चयन सूची में ओबीसी वर्ग को केवल 139 पद आवंटित हुए। यानी कुल पदों का लगभग 9.47 प्रतिशत ही ओबीसी वर्ग को मिला। इस आधार पर 257 पद कम मिलने का दावा किया जा रहा है।
यह भर्ती पंचायतीराज विभाग के अंतर्गत हुई है, जिसके मंत्री ओम प्रकाश राजभर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि विभागीय भर्ती में संवैधानिक आरक्षण का पूर्ण अनुपालन क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया।
इसी विश्लेषण में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के आरक्षण पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सामान्य वर्ग (UR) के 735 पदों के आधार पर ईडब्ल्यूएस को लगभग 73 पद मिलने चाहिए थे, जबकि भर्ती में 117 पद आवंटित किए गए। इस आधार पर 44 अतिरिक्त पद दिए जाने का दावा किया जा रहा है।
आरक्षण व्यवस्था से जुड़े जानकारों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया है कि सामान्य (UR) श्रेणी सभी वर्गों के योग्य अभ्यर्थियों के लिए खुली प्रतिस्पर्धा की श्रेणी है, जबकि ईडब्ल्यूएस आरक्षण की गणना निर्धारित संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप की जानी चाहिए।
इन तथ्यों के आधार पर पंचायतीराज विभाग की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरक्षण रोस्टर के अनुपालन को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती में आरक्षण नियमों के पालन को लेकर कोई संदेह है तो सरकार को विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
(नोट: यह खबर उपलब्ध भर्ती आंकड़ों और उनके विश्लेषण पर आधारित है। यदि राज्य सरकार या पंचायतीराज विभाग इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

