जौनपुर। खरीफ सीजन के दौरान धान की रोपाई अपने चरम पर है, लेकिन जिले का किसान इस समय खेती से अधिक व्यवस्थागत समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है। बिजली की अनियमित आपूर्ति, सहकारी समितियों पर तकनीकी दिक्कतें, फार्मर आईडी से जुड़ी खामियां और खुले बाजार में खाद की ऊंची कीमतों ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों से किसानों का कहना है कि बिजली व्यवस्था लगातार प्रभावित रहने के कारण सिंचाई कार्य समय पर नहीं हो पा रहा है। कई स्थानों पर लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने से धान की रोपाई प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में जब खेतों में हर घंटे का महत्व होता है, बिजली संकट किसानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
दूसरी ओर, सहकारी समितियों पर खाद लेने पहुंचे किसानों को भी राहत नहीं मिल रही है। किसानों के अनुसार, पीओएस (POS) मशीनों में लंबे समय से सर्वर संबंधी समस्याएं बनी हुई हैं, जिसके कारण सत्यापन और खाद वितरण की प्रक्रिया अत्यंत धीमी हो गई है। कई किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और अनेक बार बिना खाद लिए वापस लौटना पड़ता है।
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत खाद वितरण के लिए समिति की सदस्यता, फार्मर आईडी और अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में किसानों का कहना है कि उनकी फार्मर आईडी में भूमि का विवरण सही प्रकार से दर्ज नहीं है या खेतों का पूरा रिकॉर्ड लिंक नहीं हो पाया है। इस कारण पात्र किसान भी खाद प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि आवश्यक दस्तावेजों और तकनीकी प्रक्रियाओं की जटिलता के चलते खाद प्राप्त करने में अपेक्षा से अधिक समय लग रहा है। खेती के व्यस्त मौसम में यह स्थिति उनकी चिंता और बढ़ा रही है।
इधर, खुले बाजार में भी खाद की कीमतों को लेकर किसानों ने नाराजगी जताई है। किसानों के अनुसार, जहां सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है, वहीं निजी दुकानों पर डीएपी लगभग ₹2000 प्रति बोरी तक बेची जा रही है। इसी प्रकार यूरिया भी निर्धारित मूल्य से अधिक दाम पर उपलब्ध होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ निजी विक्रेता अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से मनमाने दाम वसूल रहे हैं।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। यदि कहीं निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूली जा रही है, तो संबंधित विभाग द्वारा इसकी जांच और आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ सीजन के दौरान बिजली आपूर्ति सुचारु रखना, सहकारी समितियों पर सर्वर संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान करना, फार्मर आईडी में दर्ज त्रुटियों का तत्काल निराकरण करना तथा खाद की उपलब्धता एवं मूल्य पर प्रभावी निगरानी रखना अत्यंत आवश्यक है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होगी और खेती के कार्य प्रभावित नहीं होंगे।
किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि बिजली व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए, पीओएस मशीनों की तकनीकी समस्याओं का समाधान कराया जाए, फार्मर आईडी की त्रुटियों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाए तथा निजी बाजारों में खाद की बिक्री और कीमतों की सघन जांच कर दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आवाज़ न्यूज़ किसानों से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर लगातार नजर बनाए हुए है। यदि आपके क्षेत्र में भी बिजली, खाद या कृषि संबंधी कोई समस्या है, तो उसकी जानकारी हमें भेजें, ताकि संबंधित अधिकारियों तक आपकी आवाज पहुंचाई जा सके।

