जौनपुर। भारत छोड़ो दिवस की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर सोमवार को संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर किसानों ने जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। देशव्यापी जेल भरो एवं विरोध कार्यक्रम के तहत आयोजित प्रदर्शन में किसानों ने कृषि, श्रमिक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाते हुए राष्ट्रपति के नाम जिलाधिकारी को मांगपत्र सौंपा।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि किसानों, कृषि श्रमिकों, ग्रामीण मजदूरों और अन्य मेहनतकश वर्गों के सामने कृषि एवं आर्थिक संकट लगातार बढ़ रहा है। किसानों का आरोप है कि वर्ष 2021 के किसान आंदोलन के दौरान केंद्र सरकार की ओर से दिए गए लिखित आश्वासनों के बावजूद एमएसपी, कर्जमाफी, बिजली के निजीकरण और किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने जैसे मुद्दों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
किसानों ने राष्ट्रपति के नाम सौंपे मांगपत्र में भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता नहीं करने तथा संसद में पर्याप्त चर्चा के बिना अपनाए गए मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों की समीक्षा और उन्हें रद्द करने की मांग की। साथ ही कृषि उपज के अनियंत्रित मुक्त आयात पर रोक लगाने की मांग भी उठाई।
### सी2+50 प्रतिशत फॉर्मूले पर एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी फसलों के लिए सी2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने की मांग की। किसानों का कहना है कि फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने से खेती लगातार आर्थिक दबाव में है।
### कर्जमाफी और आत्महत्या प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
मांगपत्र में किसानों और दिहाड़ी मजदूरों की ग्रामीण ऋणग्रस्तता समाप्त करने के लिए व्यापक कर्जमाफी लागू करने की मांग भी की गई। इसके साथ ही किसान आत्महत्या से प्रभावित प्रत्येक परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग रखी गई।
किसानों ने राष्ट्रपति से इन मुद्दों पर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपील की। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और कहा कि उनकी मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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