जोधपुर।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर जोधपुर के प्रतिष्ठित चिकित्सक, कवि एवं साहित्यसेवी डॉ. हस्ती मल आर्य ‘हस्ती’ को “मातृभाषा रत्न” की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें मातृभाषा के संरक्षण, संवर्धन और साहित्यिक योगदान के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान नेपाल की पंजीकृत संस्था ‘शब्द प्रतिभा बहुउद्देशीय सम्मान फाउंडेशन’ द्वारा 21 फरवरी 2026 को आयोजित कार्यक्रम में दिया गया। चयन समिति द्वारा डॉ. आर्य के मातृभाषा के लिए किए गए सतत और उल्लेखनीय प्रयासों का मूल्यांकन करते हुए उन्हें इस सम्मान के लिए चुना गया। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष आनंद गिरि मियालु एवं चयन समिति प्रमुख मंजू खरे (दतिया) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
डॉ. हस्ती मल आर्य को यह सम्मान विशेष रूप से उनकी चर्चित साहित्यिक कृति ‘अनुभूति से अभिव्यक्ति’ सहित भाषा और साहित्य के क्षेत्र में दिए गए योगदान के लिए प्रदान किया गया। वे साहित्य साधना के साथ-साथ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में भी एक प्रतिष्ठित नाम हैं।
डॉ. आर्य की अब तक कई काव्य एवं साहित्यिक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें ‘अनुभूति से अभिव्यक्ति’, ‘काव्य आयाम’, ‘भोर के मोती’, ‘हस्ती के हाइकु’ के साथ-साथ बाल साहित्य की पुस्तकें ‘देश के परिवेश’ एवं ‘नन्ही बातें: बाल चेतना’ शामिल हैं। उनकी साहित्यिक यात्रा को अब तक अनेक राष्ट्रीय स्तर के सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
वर्ष 2025–26 के दौरान उन्हें हाइकु विभूषण सम्मान, कादंबरी सम्मान, हिंदी साहित्य रत्न, साहित्य गौरव शब्द साधक सम्मान तथा साहित्य वाचस्पति सम्मान जैसे प्रतिष्ठित अलंकरण प्राप्त हो चुके हैं।
इस नवीन सम्मान पर साहित्य जगत, चिकित्सक समुदाय, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने डॉ. आर्य को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। साहित्य और चिकित्सा—दोनों क्षेत्रों में समान रूप से योगदान देने वाले डॉ. हस्ती मल आर्य अपने लेखन के माध्यम से मानवीय मूल्यों, विश्व बंधुत्व और सामाजिक चेतना का संदेश निरंतर प्रसारित कर रहे हैं।


